एक सच्चे प्यार की कहानी - Sache Pyar Ki Kahani Love Story

एक सच्चे प्यार की कहानी Sache Pyar Ki Kahani Love Story-  दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपके लिए एक ऐसे सच्चे प्यार की कहानी लेकर आयें हैं जिसे पढ़कर आपको अपना पहला प्यार याद आ जायेगा 
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एक सच्चे प्यार की कहानी  Sache pyar ki kahani love story

प्यार एक खूबसूरत अहसास है  और पहला प्यार की तो बात ही कुछ और होती है पहला प्यार जो अक्सर कच्ची उम्र में जो जाती हैं 
और यू ही बिना बात अच्छा लगने लगता है 

अनुराग 11th आर्ट्स का स्टूडेंट था वह चेहरे से गंभीर दिखने वाला और हर चीज सोच समझ कर करने वाला लड़का था । उसके पापा इंजीनियर थे पढ़ाई लिखाई में भी वह ठीक था उसके गालों के दोनों तरफ डिम्पल पड़ते थे जो उसके चेहरे को चार चांद लगा देते थे 

उसी क्लास में अंशुल नाम की। एक लड़की पढ़ती थी वह भी अनुराग से काम सुंदर नहीं थी वह भी दिखने में बहुत सुंदर थी वह बहुत ही चंचल स्वभाव की लड़की थी अनुराग और अंशुल एक दूसरे नहीं जानते थे क्योंकि स्कूल में लगभग 2000 बच्चे पढ़ते थे 

एक बार स्कूल में एनुअल function  आयोजन हुआ जो December में था पर उसकी तैयारी  महीने पहले से ही शुरू हो गई थी फंक्शन में एक play होना था इस play  की पूरी जिम्मेवारी पूनम मैडम जो कि 10th क्लास की इंचार्ज थी उनको दी गई थी

11th क्लास के ऑडिशन लिए गए क्लास में अनुराग मैडम का पसंदीदा स्टूडेंट था  और वो कल्चर एक्टिविटी में एक्टिव भी रहता था तो मैन रोल उसी को निभाना तय था 

अब Male रोल तो मिल गया था अब बारी थी किसी लड़की को मैन रोल में रखने की जिसके लिए सारी लड़कियों के ऑडिशन हुए और शहीबा जो एक फीमेल का रोल था उसके लिए अंशुल को चुन लिया गया प्ले के रिहल्सल के पहले ही दिन जब अनुराग ने अंशुल को देखा तो उसे देखता ही रह गया 

पहली ही नजर में अनुराग को अंशुल से प्यार हो गया बस वो अब प्ले कि प्रैक्टिस का इंतज़ार कर रहा था 

17 साल के अनुराग के लिए इससे बड़ी खुशी। की बात क्या हो सकती हैं की स्कूल की सबसे खूबसूरत लड़की उसकी प्रेमिका बनेगी फिर वो चाहे प्ले में ही क्यों ना 

वहीं दूसरी तरफ भी अंशुल अनुराग के प्रति एक अलग सा आकर्षण महसूस कर रही थी प्रैक्टिस। का हर। एक दिन उन्हें करीब लाता जा रहा था 

फिर एक दिन प्ले का फाइनल रिहल्सल चल रहा था प्ले के आखिरी सीन में शाहिबा ने मिर्जा यानी अनुराग के सारे तीर को तोड दिया और शाहीबा के भाइयों ने निहत्थे मिर्जा को मार दिया 

उस सीन को करते हुए शहिबा बनी अंशुल इतना खो  थी कि मिर्जा बने अनुराग को इस हालत में देखकर फूट फुट कर रोने लगी पास खड़े एक मैडम ने उसकी मासूमियत को देखकर उसे संभाला और कहां - की बेटा यह सब प्ले का पार्ट हैं कोई रियलिटी नहीं है 

उस प्ले के बाद अनुराग और अंशुल किं जिंदगी बिल्कुल बदल गई उन्हें पता ही नहीं चला कि कब एक दूसरे को इतना चाहने लगे 

अनुराग अंशुल के घर के चक्कर काटने लगा और स्कूल में भी वो दोनो थोड़ा बहुत मिलने लगे अब दोनों को एक दूसरे को देखे बिना में नहीं लगता था

एक बार अनुराग को बुखार हो गया और वह चार पांच दिन स्कूल नहीं आया अंशुल इस बीच बड़ी बेचैन हो गई क्योंकि उसके पास मोबाइल फोन भी नहीं होते थे उसका चंचल स्वभाव और अनुराग। के प्रति प्यार उसे अनुराग से मिलने जाने।  के लिए मजबुर कर रहा था वो किताब लेने के बहाने अपने एक दोस्त के साथ उसके घर चली है 

अनुराग उस अचानक घर आया देखकर हैरान हो जाता है लेकिन उसके दिल को उसे देखकर उसे एक सुकून सा मिलता हैं अंशुल की बेचैनी भी उसे मिलकर दूर हो जाती हैं 

इस उम्र में भावनाओ का सैलाब सा उठता है जिसे रोकना थोड़ा मुश्किल काम है STD Call करना पार्क में मिलना पता ही नहीं चला कि का दो साल बीत गया 

अब अनुराग कि 12th पूरी हो चुकी थी और अब अंशुल भी 11th मे आ गई थी अनुराग Law करने के लिए देहरादून चला गया अब यहां अंशुल का मन भी स्कूल में नहीं लगता था 

और उसने स्कूल कि पढ़ाई छोड़कर पॉलिटेक्निक एडमिशन ले लिया कुछ समय तक उनका मन खालीपन रहा उनका में कहीं लगता ही नहीं था एक दूसरे कि याद भी आईं । लेकिन। अब फोन पर थोड़ी बात भी हो जाती थीं लेकिन अब मिलना पॉसिबल नहीं था 

फिर धीरे-धीरे दोनों अपनी स्टडी में व्यस्त हो गए उनके अपने अपने फ़्रेंड सर्किल बन गए और समय के साथ दोनों समझदार हो गए अब उनको पता चल चुका था कि वह एक आकर्षक था जो उम्र के उस पड़ाव पर हर लड़का लड़की को अक्सर हो ही जाता है 

अनुराग के जिंदगी में आज कोई और लड़की है और अंशुल की शादी हो चुकी है इस तरह एक प्यारी सी लव स्टोरी मैं एक अच्छा सा मोड़ आता है लेकिन वो अहसास आज भी दोनों को गुदगुदाता हैं 

बारिश की बूंदे पड़ने पर मिट्टी पर जो प्यारी सी खुशबू आती है  कुछ उसी तरह का होता है पहला प्यार 
आज भी जब कभी अनुराग अपने पुराने स्कूल और शहर से गुजरता है तो उसे अंशुल के साथ बिताए पल याद आ जाते हैं और अंशुल जब कभी किसी के मुंह से अनुराग का नाम सुनते हैं तो पलट कर ज़रूर देखती है

 पहला प्यार कोई कहां भूल पाता है

निष्कर्ष 

आशा करते हैं की यह सच्चे प्यार की कहानी आपको जरुर पसंद आयी होगी और इस कहानी को पढ़कर आपको भी अपना पहला प्यार याद आ गया होगा  


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